मध्य मुंबई के माझगांव कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश एजाजुद्दीन सलाउद्दीन क़ाज़ी को भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने वांछित यानि वांटेड घोषित किया है। वे फरार हैं। एजाजुद्दीन सलाउद्दीन क़ाज़ी के क्लर्क चंद्रकांत हनुमंत वासुदेव को ACB ने गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई 25 लाख रुपये के रिश्वत के एक मामले में हुई है।
बुधवार, 12 नवम्बर 2025 को ACB की तरफ से जारी प्रेस नोट में इसका खुलासा हुआ है।
प्रेस नोट के अनुसार शिकायतकर्ता की पत्नी की कंपनी की जगह पर एक व्यक्ति ने कब्ज़ा कर लिया है। उसकी पत्नी ने साल 2015 में बॉम्बे उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल की थी। 27 अप्रैल 2016 को बॉम्बे उच्च न्यायालय ने उस जगह पर थर्ड पार्टी राइट्स निर्माण पर स्टे दे दिया था। बॉम्बे उच्च न्यायालय ने तब यह नियम भी पारित कर दिया था कि जिस केस में 10 करोड़ रुपये से कम की राशि होगी वह केस दीवानी न्यायालय में चलाया जाएगा। मार्च 2024 में बॉम्बे उच्च न्यायालय ने यह कमर्शियल सूट माझगांव सत्र न्यायालय में फॉरवर्ड कर दिया था। यह मामला अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश एजाजुद्दीन सलाउद्दीन क़ाज़ी के कोर्ट (नंबर 14) में लिस्टेड हुआ।
9 सितम्बर 2025 को न्यायाधीश एजाजुद्दीन सलाउद्दीन क़ाज़ी (55) के क्लर्क चंद्रकांत हनमंत वासुदेव (40) ने शिकायतकर्ता से मोबाइल पर संपर्क किया और बोला कि आमने-सामने मिलकर बात करनी है। 12 सितम्बर 2015 को चंद्रकांत हनमंत वासुदेव ने शिकायतकर्ता से चेम्बूर के स्टारबक्स कैफे में मुलाकात की। शिकायतकर्ता के फेवर में ऑर्डर करने के लिए चंद्रकांत हनमंत वासुदेव ने 25 लाख रुपये की मांग की। इसमें 15 लाख रुपये न्यायाधीश एजाजुद्दीन सलाउद्दीन क़ाज़ी के लिए और 10 लाख रुपये खुद के लिए मांगे।
चंद्रकांत हनमंत वासुदेव शिकायतकर्ता को फोन कर-कर के रिश्वत की राशि के लिए तकादा करने लगा। इससे परेशान शिकायतकर्ता ने 10 नवम्बर 2025 को ACB के वर्ली मुख्यालय में शिकायत कर दी। उसी दिन 10 नवम्बर 2025 को ही ACB ने वेरिफिकेशन कर लिया और पाया कि चंद्रकांत हनमंत वासुदेव 15 लाख रुपये न्यायाधीश एजाजुद्दीन सलाउद्दीन क़ाज़ी के लिए और 10 लाख रुपये खुद के लिए मांग रहा है। उसके दूसरे दिन 11 नवम्बर 2025 को माझगांव कोर्ट के प्रांगण में 15 लाख रुपये लेते ACB ने चंद्रकांत हनमंत वासुदेव को गिरफ्तार कर लिया। रिश्वत की रकम 15 लाख रुपये मिल जाने पर चंद्रकांत हनमंत वासुदेव ने न्यायाधीश एजाजुद्दीन सलाउद्दीन क़ाज़ी को फोन कर इन्फॉर्म किया कि रकम मिल गयी है। न्यायाधीश एजाजुद्दीन सलाउद्दीन क़ाज़ी ने क्लर्क चंद्रकांत हनमंत वासुदेव को उसके इस ‘उपकार’ के लिए थैंक्स बोला।
इस बाबत ACB ने न्यायाधीश एजाजुद्दीन सलाउद्दीन क़ाज़ी और क्लर्क चंद्रकांत हनुमंत वासुदेव के खिलाफ भ्रष्टाचार प्रतिबंधक अधिनियम-1988 की धारा 7, 7(अ) और 12 के तहत FIR (नंबर 35/2025) दर्ज की है। फिलहाल माननीय न्यायाधीश महोदय ज़नाब एजाजुद्दीन सलाउद्दीन क़ाज़ी जी फरार हैं।
चंद्रकांत हनमंत वासुदेव को न्यायालय ने 5 दिन के लिए ACB की हिरासत में भेज दिया।
